September 25, 2021

JDU में बदलाव के आसार, ‘तीर’ की बदलेगी ‘कमान’!, RCP की जगह कुशवाहा हो सकते हैं अध्यक्ष

Patna: प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी JDU में एक बार फिर बड़े बदलाव के आसार नजर आने लगे हैं. एक बार फिर पार्टी में अध्यक्ष का चेहरा बदल सकता है. इसके कयास तभी लगने शुरु हो गए थे, जब आरसीपी सिंह (RCP Singh) ने केंद्र सरकार में मंत्री पद की शपथ ली. ऐसा माना जाने लगा कि पार्टी में अंदरखाने कुछ खिचड़ी पकने लगी है. क्योंकि आरसीपी सिंह के मंत्री बनने के बाद पार्टी के कई नेताओं की उम्मीदें टूट गई और पार्टी ने साल 2019 वाले अपने स्टैंड से कदम भी हटा लिया. ऐसे में बदलाव की आशंका तेज होने लगी.

इस बीच प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक को लेकर भी पहले जो लेटर जारी हुआ, उसमें आरसीपी सिंह का नाम शामिल था. लेकिन बाद में दूसरा लेटर जारी किया गया, जिसमें से आरसीपी सिंह का नाम हटा दिया गया. तब तो इस कयास को और बल मिला कि आरसीपी सिंह की छुट्टी हो सकती है.  आखिरकार बैठक में जो कुछ सीएम नीतीश कुमार ने कहा, उसके बाद तो ऐसा लग रहा है कि अध्यक्ष को बदलने का अब मात्र औपचारिक ऐलान बाकी है.

 

अध्यक्ष पद से RCP की होगी छुट्टी?, कुशवाहा का ‘सपना’ होगा साकार! 

JDU प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने JDU संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा की जमकर तारीफ की. इस दौरान नीतीश कुमार ने कहा कि ‘उपेन्द्र कुशवाहा का सपना ज़रूर पूरा होगा’. नीतीश कुमार की इस बात को कुशवाहा के अध्यक्ष बनने से जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसा माना जा रहा है कि नीतीश कुमार अपने पुराने फॉर्मूले पर चलकर कुर्मी और कोइरी जाति को साथ लाना चाहते हैं. इसके जरिए ओबीसी वर्ग का एक बड़ा हिस्सा JDU के पाले में आ सकता है. अगर ऐसा हो सका तो JDU की ताकत एक बार फिर पहले जैसी हो सकती है. उपेन्द्र कुशवाहा का JDU में वापस आना भी उसी फॉर्मूले का हिस्सा था.

केन्द्रीय मंत्री और JDU के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने भी इशारों में इस बात पर मुहर लगाई कि पार्टी का अध्यक्ष बदला जा सकता है. आरसीपी सिंह ने कहा कि ‘मैं कोई भी काम अच्छे से कर सकता हूं. केन्द्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा सकता हूं और संगठन का काम भी बेहतर तरीके से देख सकता हूं. लेकिन अगर संगठन चाहेगा तो मैं किसी भी वक्त किसी काबिल साथी के हाथ में पार्टी का नेतृत्व सौंप सकता हूं’. आरसीपी सिंह के इस बयान को भी इस बात से जोड़कर देखा जा रहा है कि उन्हें पार्टी की तरफ से अध्यक्ष पद छोड़ने का इशारा मिल गया हो.

 

BJP ने बदलाव को स्वाभाविक प्रक्रिया कहा

JDU में फिलहाल जो कुछ भी हो रहा है, उसे लेकर बिहार की सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. JDU के सहयोगी दल से लेकर विपक्षी दलों की भी इस पर नज़र बनी हुई है. NDA में JDU की पुरानी सहयोगी BJP ने अध्यक्ष बदले जाने के कयास को बहुत तूल देने से इंकार कर दिया. BJP इसे किसी भी संगठन के लिए एक स्वाभाविक प्रक्रिया मान रही है. BJP का कहना है, ‘JDU में नीतीश कुमार ही सर्वमान्य नेता हैं. पार्टी का अध्यक्ष जो भी हो, लेकिन नीतीश कुमार से ऊपर पार्टी में कोई नहीं है. नीतीश कुमार जिसे चाहेंगे, वही पार्टी अध्यक्ष होगा. अगर आरसीपी सिंह केंद्र में मंत्री बन गए हैं और वो अध्यक्ष पद किसी और को सौंपते हैं, तो ये तो बहुत आदर्श फैसला होगा. अगर ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का फॉर्मूला JDU में होता है तो दूसरे दलों को इससे सीख लेनी चाहिए. BJP तो पहले से इस सिद्धांत पर चलती रही है. विरोधियों को इस पर निशाना साधने की बजाय इसका अनुसरण करना चाहिए’.

वहीं, विपक्ष लगातार JDU में हो रही हलचल पर हमलावर है. विपक्ष इसे JDU की अंदरुनी लड़ाई और गुटबाजी बता रहा है. विपक्ष का कहना है कि ‘नीतीश कुमार के पास एक भी ऐसा भरोसेमंद नेता नहीं बचा, जिसे वो अध्यक्ष पद सौंप सकें. अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने खुद सबका भरोसा तोड़ा, इसलिए आज उन्हें भी किसी पर विश्वास नहीं है. इसलिए पार्टी में हाल ही में आए उपेन्द्र कुशवाहा को अध्यक्ष बनाने की बात सामने आ रही है. सच्चाई ये है कि JDU में गुटबाजी चरम पर है और पार्टी अब अपने आखिरी पड़ाव में है’.

एक्सपर्ट्स ने नीतीश को माना ‘पावरफुल’, JDU में बदलाव को ‘शक्ति संतुलन’ बताया 

सत्तापक्ष और विपक्ष में इस मुद्दे पर टकराव जमकर हो रहा है. एक्सपर्ट्स की राय में नीतीश कुमार अब भी JDU में पावर सेंटर हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक ‘नीतीश कुमार JDU में सबसे पावरफुल हैं. उनके अलावा कोई और पार्टी में फैसला नहीं कर सकता है. नीतीश कुमार अध्यक्ष रहें या न रहें, पार्टी में वही होगा जो नीतीश कुमार चाहेंगे. नीतीश कुमार अगर आरसीपी सिंह को हटाकर किसी और को अध्यक्ष बनाते हैं, तो ये शक्ति संतुलन की तरह है. आरसीपी सिंह केंद्र में मंत्री बन चुके हैं इसलिए अध्यक्ष पद पर किसी और को बिठाकर आरसीपी को भी कंट्रोल में रखने की कवायद है.’

कुल मिलाकर अब ये लगभग साफ हो चुका है कि JDU में जल्द ही बदलाव का औपचारिक ऐलान हो जाएगा. ऐसी संभावना है कि 31 जुलाई को दिल्ली में होने वाली JDU की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नए अध्यक्ष की ताजपोशी का रास्ता साफ हो जाएगा.

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